विकासनगर। प्रधानाचार्य विहीन माध्यमिक विद्यालयों में वित्तीय प्रभार मिनिस्टीरियल कर्मियों को दिए जाने की कवायद से शिक्षकों का पारा चढ़ गया है। इसे शिक्षक खुद के आत्मसम्मान पर चोट बता रहे हैं। शनिवार को राजकीय शिक्षक संघ की ब्लॉक इकाई ने ऑनलाइन बैठक कर इस कवायद का विरोध करते हुए जनपदीय अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर जल्द उचित कदम उठाने की बात कही। ब्लॉक अध्यक्ष सुधीर कांति ने कहा कि अधिकांश विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं। विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक प्रभारी प्रधानाचार्य के तौर पर काम कर रहे हैं। ऐसे में विद्यालयों में आहरण वितरण का प्रभार खंड शिक्षाधिकारी के पास होता है। अब खंड शिक्षाधिकारी की गैर मौजूदगी में ये प्रभार मिनिस्टीरियल कर्मचारियों को दिए जाने का प्रस्ताव शिक्षा विभाग की ओर सरकार को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने प्रभारी प्रधानाचार्य को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा देकर आहरण वितरण अधिकारी बनाने की बात कही थी, लेकिन अब इसके विपरीत निर्णय लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की ये कवायद शिक्षकों के आत्म सम्मान पर चोट है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। कहा कि, अधिकारी लगातार शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात कर रहे हैं। प्रधानाचार्य के शत-प्रतिशत पदोन्नति के पद पर सीधी भर्ती करने का निर्णय लिया गया है, जिसका सीधा प्रभाव शिक्षकों पर पड़ेगा। विभाग के इस निर्णय का भी विरोध किया गया। कहा कि अधिकारियों ने तानाशाही पूर्ण रवैया अख्तियार किया हुआ है। राजकीय शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष ने कहा कि विभागीय अधिकारी सीधे शिक्षकों के आत्मसम्मान पर चोट करने की कोशिश कर रहे हैं, इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्तीय अधिकार मिनिस्टीरियल कर्मियों को देने के बजाय 5400 ग्रेड पे वाले शिक्षकों को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा दिया जाना चाहिए, जिससे प्रभारी प्रधानाचार्यों को वित्तीय अधिकार मिल सके। इसके साथ ही बीईओ की गैर मौजूदगी में प्रभार वरिष्ठ प्रधानाचार्य को दिया जाना चाहिए। बैठक में ब्लॉक मंत्री सीपी नौटियाल, तेजवीर मलिक, मंजू कुकरेती, बलविंदर कौर, रेनू तोमर, बलवीर रावत आदि मौजूद रहे।




