-उत्तराखंड की जमीन श्रीअन्न की खेती के लिए उपयुक्त
देहरादून। देश के नामचीन आहार विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ खादर वली ने कहा कि श्रीअन्न की खेती के लिए किसी खास जमीन की जरूरत नहीं है। उत्तराखंड की जमीन श्रीअन्न की खेती के लिए उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि देश को डाक्टर नहीं किसान निरोग कर सकते हैं। डॉ खादर ने इंडियन पब्लिक स्कूल राजावाला में आयोजित मिलेट्स महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को ये बात कही। डा. वली ने कहा कि बाजार ने हमारे खानपान का तरीका खराब कर दिया है। इससे निजात पाने का एकमात्र उपाय श्रीअन्न का नियमित सेवन करना है। चावल, गेहूं, चीनी, मैदा और मिलावटी तेल खाने से हम बीमार हो रहे हैं। हमारे शरीर का ग्लूकोज संतुलन गड़बड़ा गया है। जिससे हम बीमार होते जा रहे हैं और समय से पहले मौत के मामले तक सामने आ रहे हैं। श्रीअन्न में अद्भुत औषधीय गुण हैं। कोदो, कुटकी, कंगनी, सावां और हरा सावां का नियमित सेवन करने से हम एक नहीं कई बीमारियों से बच सकते हैं। निजात पा सकते हैं। डॉ खादर ने कहा कि शरीर की अधिकांश बीमारियों की शुरुआत ग्लूकोज के असंतुलन से होती है। श्रीअन्न इस असंतुलन को दूर करने की अचूक दवा है। लेकिन हमने अपना स्वास्थ्य रसोई घर में खो दिया है और डाक्टर के पास जाकर स्वास्थ्य ढूँढ़ते हैं। समारोह की अध्यक्षता अवसर ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष पूर्व सांसद डॉ आर के सिन्हा ने की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के बिछाये जाल में हमलोग फंस चुके हैं ,जो हमें बीमार बनाने के कुचक्र में वर्षों से लगा हुआ है। चावल, गेहूं और गन्ना के उत्पादन में हमने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। हालात यह हो गई है कि देश में जल संकट गहराने लगा है। एक किलो चावल के उत्पादन में 8 हजार लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है जबकि एक किलो गेहूं के उत्पादन में 10 हजार लीटर और एक किलो गुड़ बनाने में 28 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। जबकि एक किलो मिलेट (श्रीअन्न) के उत्पादन में महज ढाई सौ लीटर पानी की खपत होती है। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष पद्मश्री रामबहादुर राय, सेवानिवृत्त आईएएस और इंडियन पब्लिक स्कूल के कार्यपालक अध्यक्ष डीके कोटिया, वरिष्ठ पत्रकार राधा रमण समेत कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
श्रीअन्न उगाएं, समाज को निरोग बनाएं : डा. वली











