देहरादून। सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने चार श्रम संहिता लागू करने के विरोध में व मजदूर विरोधी इन संहिताओं को निरस्त करने के संबंध में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर श्रम विरोधी कानूनों के लेकर रोष जाहिर किया है। जनपद टिहरी गढ़वाल के श्रम प्रवर्तन अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में सीटे के पदाधिकारियों ने बताया है कि भारत सरकार ने चार श्रम कानून को लागू किया है, जो कि पूरी तरह से श्रम विरोधी हैं। यह श्रम कानून विपक्षी सांसदों के निष्कासन के दौरान एक तरफा पास किये गये हैं। इन श्रम कानूनों को लागू करने में ट्रेड यूनियनों की भूमिका को दर किनार रखा गया है। जबकि ट्रेड यूनियन लगातार इन श्रम कानूनों का विरोध करते आ रहे हैं। इन श्रम कानूनों को रद्द कर अल्प वेतन भोगी कर्मचारी को न्यूनतम 26 हजार का वेतन निर्धारित किया जाय। मांग है कि इन चार श्रम कानूनों को तत्काल निरस्त किया जाय। पूर्व से प्रचलित श्रम कानूनों को लागू किया जाय। इन श्रम कानूनों से श्रमिकों का उत्पीड़न बढ़ेगा। नये कानूनों में न्यूनतम वेतन निर्धारण का कोई आधार नहीं है। इसके तहत श्रमिकों को 12 घंटे काम करना अनिवार्य होगा। सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी इनमें कोई ठोस प्रावधान नहीं है। जिससे श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यूनियन की मान्यता को कठोर बनाया गया। जिससे श्रमिकों की आवाज दबाने का काम किया गया है। इस तरह से तमाम पाबंदियां श्रमिकों पर लगने से देश में श्रमिकों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए इन नये श्रम संहिता को निरस्त कर पुरानी श्रम कानूनों को तत्काल लागू किया जाय। ज्ञापन देने में सीटू के जिला सचिव चिंतामणी थपलियाल, जिला उपाध्यक्ष नित्यानंद बहुगुणा, लक्ष्मी नेगी, राजेश चमोली, रतन सिंह पंवार आदि शामिल रहे।




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