देहरादून। इंश्योरेंस एम्प्लॉइज यूनियन ने ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में अपनी हिस्सेदारी और कम करने के निर्णय के विरुद्ध प्रदर्शन किया।मंडल मुख्यालय में प्रदर्शन के दौरान संगठन के महामंत्री नंदलाल शर्मा ने बताया कि भारत की अग्रणी वित्तीय संस्था में जनता की हिस्सेदारी का एक और भाग बाजार के हवाले किया जा रहा है। इससे पहले मई 2022 में एलआईसी के आईपीओ के माध्यम से 3.5% हिस्सेदारी बेची जा चुकी थी। यह नया विनिवेश सरकार की आर्थिक नीतियों के गहरे संकट को भी उजागर करता है। निवेश बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने और टिकाऊ तरीकों से राजस्व बढ़ाने में असफल रहने के कारण सरकार अब राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए सार्वजनिक संपत्तियां बेचने पर अधिकाधिक निर्भर होती जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में ही सरकार सात सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शेयर बेचकर ₹21,000 करोड़ से अधिक जुटा चुकी है। आरोप लगाया कि यह अपनी आर्थिक नीतियों की विफलताओं को छिपाने के लिए देश की अमूल्य सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने जैसा है। कहा कि एलआईसी केवल एक लाभ कमाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के विश्वास और बचत से निर्मित राष्ट्रीय संस्था है। कहा कि प्रस्तावित ओएफएस को तत्काल वापस लिया जाए। इस अवसर पर प्रमोद गोयल, संजय उनियाल, गीता जोशी , ईशा, शशि आदि मौजूद रहे।










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