देहरादून। नीट में फर्जी प्रमाण पत्र से आवेदन कर एमबीबीएस में सरकारी कॉलेज में सीट पाने के मामले में एसआईटी ने बिहार निवासी एक सरगना समेत दो आरोपी गिरफ्तार किए हैं। फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र से दाखिले के मामले में यह गिरफ्तारियां की गई हैं। आरोपियों में एक मेरठ की कंसलटेंसी का बिहारी निवासी संचालक और एक दाखिला पाने वाली छात्रा का पिता शामिल हैं। एसआईटी के राडार पर मामले में 10 से 12 और लोग भी आए हैं। इनमें कुछ जल्द गिरफ्तारी किए जा सकते हैं। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर गिरफ्तारी की जानकारी दी। बताया कि बीते 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमनटाउन थाने में क्षेत्रीय पटवारियों ने पांच लोगों पर केस दर्ज कराया। आरोप था कि अपनी सरकार पोर्टल पर कुछ आवेदकों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हासिल कर लिए। मामले में केस दर्ज कर पुलिस जांच शुरू हुई। 18 सितंबर को एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी जांच में खुलासा हुआ कि प्रमाण पत्र के लिए पोर्टल पर हुए आवेदन और नीट में लगे शैक्षिक प्रमाण पत्रों के दस्तावेजों में अभ्यर्थियों के पते अलग-अलग थे। टीम ने शिक्षण संस्थानों में जाकर दाखिले से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों को कब्जे में लिया। जिससे फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वालों के असली पतों का पता लगा। एसआईटी ने फर्जीवाड़े में 45-45 लाख रुपये में सरकारी सीट दिलाने की डील करने के आरोपी रुपेश पंडित उम्र 30 वर्ष पुत्र गोपाल पंडित मूल निवासी शिवपुरी थाना केहाट, जिला पूर्णिया (बिहार), हाल निवासी प्लाट नंबर 90, द्वारिकापुरी कालोनी, थाना ब्रह्मपुरी, मेरठ, यूपी और एक छात्रा के पिता अरविंद कुमार पुत्र विजयपाल सिंह निवासी बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, जिला हरिद्वार को गिरफ्तार किया।
फर्जी प्रमाण पत्र से एमबीबीएस दाखिले में दो आरोपी गिरफ्तार








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