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गरीबी के चलते मजदूरी करने जा रही मां अपने बेटे और बेटी समेत काल के गाल में समाई, पसरा मातम

ट्रक पलटने से छह मजदूरों और बच्चों की हुई मौत, 15 घायल

कानपुर 02 मार्च (आरएनएस)। किसी को क्या पता था कि बेटे की भूख शांत करने के लिए आलू खोदाई का फैसला लेने वाली मां अपने बेटे और बेटी समेत काल के गाल में समा जाएंगी। कानपुर देहात के भोगनीपुर के पास सडक़ दुर्घटना में सदर कोतवाली क्षेत्र के कलौलीतीर (बरदहा) गांव निवासी मां बेटे और बेटी की मौत की सूचना से गांव में मातम छाया है। हर किसी की जुबान पर उनकी गरीबी की चर्चा कर आंखें नम रहीं। वहीं घटना में कलौलीतीर,बरदहा व हेलापुर गांव निवासी छह लोग घायल होने की सूचना पर सदर तहसीलदार संबंधित लेखपालों के साथ उनके संबंध में जानकारी जुटाते रहे।
सदर कोतवाली क्षेत्र के कलौलीतीर गांव निवासी श्रीकांत मजदूरी करता है। स्थानीय स्तर पर मजदूरी के अलावा वह काम को लेकर बाहर भी चला जाता है। कुछ दिन पूर्व वह मध्य प्रदेश के भिंड के डबरा कस्बे में काम के लिए गया था जबकि उसकी पत्नी 42 वर्षीय राधा, 11 वर्षीय बेटी आसना व आठ वर्षीय कोमल और चार वर्षीय बेटे सूरज के साथ गांव में रह रही थी। ग्रामीणों के अनुसार गरीबी के चलते वह सूरज के लिए पड़ोस से दूध मांगकर किसी तरह काम चला रही थी। तभी उससे गांव की शिवप्यारी ने आलू खोदाई करने के लिए सिरसागंज फिरोजाबाद चलने को कहा जिसके बदले 220 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलने की बात कही। जिस पर बेटे की भूख शांत करने व बेटियों के खातिर वह उनके साथ जाने को तैयार हो गई। सोमवार शाम पांच बजे वह अपने बच्चों को साथ लेकर गांव के ही अन्य लोगों के साथ मजूदरी करने को चली गई। जिसके बाद ग्रामीणों को कानपुर के भोगनीपुर के निकट मऊखास गांव में ट्रक पलटने से राधा, उसकी बेटी कोमल व बेटे सूरज की मौत की सूचना मिली। श्रीकांत के चचेरे भाई राघवेंद्र ने बताया कि श्रीकांत भूमिहीन है। मजदूरी के अलावा उनके पास भरण पोषण के लिए अन्य कोई साधन नहीं है। बताया परिजन अकबरपुर जिला अस्पताल गए हैं। वहीं गांव के 48 वर्षीय लालाराम, उनकी 40 वर्षीय पत्नी रज्जन देवी, 65 वर्षीय शिवलाल, 70 वर्षीय शिवप्यारी व हेलापुर गांव निवासी 60 वर्षीय सुमित्रा के घायल होने की सूचना है।