देहरादून। दिल्ली के चुनाव नतीजों पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि विपक्ष का एक गढ़ और ढह गया है। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन के सभी साथियों के लिए एक सबक की तरह है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कमजोर होना लोकतंत्र, संविधान और सामान्य जन के हित में नहीं है। बता दें कि दिल्ली चुनाव प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वहां करीब 40 से अधिक छोटी-बड़ी जन सभाएं की थीं। उन्हें उम्मीद थी चुनाव नतीजे गठबंध के पक्ष में आएंगे। लेकिन यह विपरीत रहे। हार पर उन्होंने कहा कि गठबंधन में हमको एक बात अपने मन में रखनी पड़ेगी कि प्रत्येक पार्टी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस, गठबंधन का केंद्रीय ध्रुव है। यदि केंद्रीय ध्रुव को कमजोर करेंगे तो उससे किसी को भी लाभ नहीं होगा। रावत ने कहा कि कांग्रेस के लिए अनेक चुनौतियां हैं, इनमें एक चुनौती दिल्ली की भी है। अब संपूर्ण शक्ति लगाकर दिल्ली में एक-एक कार्यकर्ता के साथ जुड़कर अभी से नए सिरे से संगठन को खड़ा करना पड़ेगा। वर्ष 2026 और 27 की चुनौतियों के लिए भी अभी से काम करना पड़ेगा। वर्तमान कार्यकर्ताओं को जोड़ने वाला और लगभग 20-25 प्रतिशत और नए कार्यकर्ता तैयार करने वाला संगठन खड़ा करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह काम कठिन है, मगर सही व्यक्ति के चुनाव के साथ इसे संभव बनाया जा सकता है। विपक्ष की एक और हार लोकतंत्र प्रेमी लोगों के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।
दिल्ली की हार गठबंधन के साथियों के लिए सबक: हरीश



