देहरादून। धराली से लौटे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने रविवार पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार को आपदा में लापता लोगों का स्पष्ट आंकड़ा जारी करना चाहिए। सरकार आंकड़ा जारी नहीं करके सिर्फ अपना चेहरा बचाना चाहती है। मुख्यमंत्री को छोड़कर कोई भी मंत्री अब तक धराली क्यों नहीं गया है। जबकि उत्तरकाशी और धराली में एक-एक मंत्री को कैंप करना चाहिए था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने कहा कि वह राजनीति करने नहीं बल्कि जमीनी हालात जानने और वहां के लोगों को यह भरोसा दिलाने धराली गए थे कि हम सब उनके साथ हैं। लेकिन मौके पर स्थिति उलट है। स्थानीय लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। रेस्क्यू के नाम पर उन्हें हेलीकॉप्टर से नहीं ले जाया जा रहा है। माहरा ने सवाल उठाया कि धराली में बड़ी संख्या में नेपाल और बिहार के मजदूर काम करते थे। पूरे प्रदेश में ऐसे काम करने वालों का पुलिस-प्रशासन सत्यापन करवाता है। चारधाम पंजीकरण के साथ ही होटल में रुकने वालों तक का ब्यौरा लिया जाता है, तो फिर धराली वालों का रिकॉर्ड अब तक जारी क्यों नहीं किया जा रहा है। आपदा के वक्त एक्टिव मोबाइलों के आधार पर यह रिकॉर्ड जुटा सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हर्षिल-धराली को लेकर अगर सरकार के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, पूर्व सैनिक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष रामरतन सिंह नेगी, महामंत्री नवीन जोशी, प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, सुजाता पॉल, पंकज क्षेत्री मौजूद रहे। वैकल्पिक रास्ते पर नहीं कर रहे विचार सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और बीआरओ के हौसले की करन माहरा ने तारीफ की। कहा कि स्थानीय प्रशासन का फोकस सिर्फ हेलीकॉप्टर पर है, जबकि यहां सबसे पहले वैकल्पिक पैदल रास्ते तैयार किए जाने चाहिए। ताकि स्थानीय लोग खुद आवाजाही कर सकें। हम पैदल गए और अपने साथ 45 से अधिक नेपाल और बिहार के लोगों को पैदल लाए हैं। एसडीआरएफ ने खतरनाक जगहों पर रास्ते पार कराने में मदद की। पांच हजार की सहायता वह भी चेक से करन माहरा ने उन्होंने पांच-पांच हजार रुपये की सहायता राशि को लेकर सवाल उठाए। कहा कि यह नाकाफी है और ऊपर से चेक दिए जा रहे हैं। जहां अब कुछ नहीं बचा है। लोग पैदल नहीं जा पा रहे हैं, वह लोग इन पांच हजार के चेक कहां किस बैंक जाकर कैश करवाते। यही वजह है लोगों ने इन्हें लेने से इंकार किया। धराली के लिए पर्याप्त मशीनें लगानी जरूरी धराली में 80 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैले मलबे को हटाने के लिए तीन पोकलैंड और जेसीबी मशीनों को उन्होंने नाकाफी बताया। कहा कि इसके लिए और मशीनों की जरूरत होगी। लेकिन यह सबकुछ हमारे जाने से पहले शुरू हो जाता तो यहां आपदा के बाद के 72 घंटे में मलबे में दबे कुछ लोगों को जिंदा निकाल पाना भी संभव था। कांग्रेस के वक्त बने पुल से चल रहा काम करन माहरा ने कहा कि हर्षिल से पहले दो वैली ब्रिज 2013 की आपदा के बाद कांग्रेस के समय बनाए थे, इन स्थानों पर अभी तक पक्के पुल नहीं बना जा सके हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग लोहारी नागपाला परियोजना को जारी रखने के पक्ष में हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी यह आश्वासन दिया था, लेकिन यहां परियोजना की टनल बंद होने के टेंडर तक कर दिए गए हैं।



