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मंदिर को हटाने का विरोध

तालाब की जमीन पर बने हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई के खिलाफ आरएसएस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। एसडीएम ने आवास पर बुलवाकर उनसे बात की तथा मंदिर को दूसरी जगह जमीन देने का भरोसा दिलाया। उनके राजी होने पर देर रात मूर्ति को दूसरी जगह स्थापित कर मंदिर ध्वस्त किया जा सका। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने तालाब या सडक़ की जमीन पर बने धार्मिक स्थलों को हटाने के निर्देश राज्यों को दिए थे। इस पर काफी मंदिर, मस्जिद हटाए गए थे। हाल ही में किसी ने शासन से शिकायत की थी कि खेड़ी गांव में पुरकाजी, हरिद्वार एनएच से सटे तालाब की जमीन पर बने हनुमान मंदिर को नहीं हटाया गया है। इस पर प्रमुख सचिव गृह ने मंदिर को तत्काल हटाने के आदेश जारी किए थे। आदेश पर शनिवार शाम को तहसीलदार सुशीला कोठियाल जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचीं, पर मंदिर हटाने से पहले ही आरएसएस के कुशलपाल सिंह, राजकुमार, आलोक पंवार सहित काफी लोग वहां पहुंचकर हंगामा करने लगे। तहसीलदार ने आदेशों का हवाला दिया, लेकिन लोग मंदिर के सामने धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। विरोध की सूचना पर भारी संख्या में पुलिस व पीएसी भी मौके पर बुला ली गई। बाद में एसडीएम पूरण सिंह राणा ने विरोध कर रहे आरएसएस के मुख्य नेताओं को अपने आवास पर बुलाकर वार्ता की। एसडीएम ने उन्हें मंदिर के लिए गांव में भूमि देने का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों के राजी होने पर मंदिर की मूर्ति को दूसरी जगह स्थापित कराया गया। और छह घंटे तक चले हंगामे के बाद देर रात मंदिर ध्वस्त किया जा सका। एसडीएम राणा ने बताया कि मंदिर हटाने की सूचना शासन को भिजवा दी गई है। मंदिर के लिए गांव में दूसरी जगह देखी जा रही है।

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