देहरादून। कोशिशें परवान चढ़ी तो महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में इस साल के आखिर तक राज्य के सभी जिलों को पूर्णकालिक जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) मिल जाएंगे। वर्तमान में केवल चार जिलों में ही डीपीओ तैनात हैं, जबकि अन्य में समाज कल्याण अधिकारियों को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपकर काम चलाया जा रहा है। विभाग के निदेशक मेजर योगेंद्र यादव के अनुसार डीपीओ के सीधी भर्ती के दो और पदोन्नति के सात पदों को भरने के मद्देनजर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा गया है।महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सहायता, सम्मान और स्वावलंबन से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला प्रोबेशन अधिकारियों (डीपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बावजूद इसके महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में इन पदों को भरने की दिशा में गंभीरतापूर्वक कदम नहीं उठाए गए। ऐसे में कामचलाऊ व्यवस्था कारगार साबित नहीं हो पा रही है। विभाग को भी अब इसका अहसास होने लगा है। विभाग में प्रत्येक जिले में डीपीओ का एक पद सृजित है, जबकि एक पद निदेशालय में है। वर्तमान स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर व अल्मोड़ा जिलों में ही पूर्णकालिक डीपीओ तैनात हैं। निदेशालय में भी यह पद भरा हुआ है। अलबत्ता, नौ जिलों में समाज कल्याण अधिकारियों के माध्यम से इन पदों का काम जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। जाहिर है कि दो-दो दायित्व होने से समाज कल्याण अधिकारियों को भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। दरअसल, विभाग में डीपीओ के पदोन्नति सात और सीधी भर्ती के दो पद रिक्त रहे हैं। पदोन्नति के लिए कार्मिकों की पांच साल की सेवा पूरी होना आवश्यक है, लेकिन अब तक इन पदों पर पदोन्नति के लिए कोई भी कार्मिक यह पात्रता पूरी नहीं कर पा रहा था। इस साल के आखिर में पदोन्नति के लिए कई कार्मिक इसके पात्र हो जाएंगे।
राज्य के सभी जिलों को मिलेंगे इस साल पूर्णकालिक डीपीओ




