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यूकॉस्ट सम्मेलन: वैज्ञानिक अनुसंधान जीमनी स्तर पर होने चाहिए: ऋतु खंडूड़ी

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के सम्मेलन में मुख्य अतिथि ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान जीमनी स्तर पर होने चाहिए। दून विवि में आयोजित सम्मेलन के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि अनुसंधान में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण, जल संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया। सम्मेलन में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने यूकॉस्ट को सहयोगी भागीदार बनने के लिए धन्यवाद दिया और विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सिलक्यारा विजय अभियान को उम्मीद और दृढ़ता का प्रतीक बताया। यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक एवं आयोजन सचिव डॉ. डीपी उनियाल ने बताया कि इस सम्मेलन में 1500 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही। इस दौरान जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और रक्षा में एआई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन सत्र आयोजित किए गए। सम्मेलन में 13 विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों को यंग साइंटिस्ट पुरस्कार प्रदान किए गए। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि हिमालय हमेशा मार्गदर्शक रहे हैं और आगे भी रहेंगे। 2047 तक उत्तराखंड वैश्विक स्तर पर अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए पहचाना जाएगा।
13 सत्रों में 200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत
सम्मेलन के 13 सत्रों में 200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही 24 युवा वैज्ञानिकों को पुरस्कार दिए गए। जबकि 50 से अधिक स्टॉलों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति को प्रदर्शित किया गया। इस मौके पर पद्म भूषण प्रो. केएस वाल्दिया और डॉ. धीरेंद्र स्वामी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।