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पुरानी पेंशन बहाली के लिए सड़क पर उतरे शिक्षक, किया सचिवालय कूच

देहरादून। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाली, टीईटी परीक्षा निरस्त करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षकों ने सोमवार को सचिवालय कूच किया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए सरकार से बारह सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की। पुलिस ने सचिवालय रोड पर बैरीकेडिंग लगाकर सभी को आगे जाने से रोक दिया। सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षक, हिमाचल, जम्मु कश्मीर आदि राज्यों के शिक्षक व कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि पहले परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित हुए। यहां वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने मांगों पर सुनवाई नहीं होने को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षक भर्ती और शिक्षा प्रणाली से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके बाद नारे लगाते हुए शिक्षक सचिवालय की तरफ बढ़े। सचिवालय रोड पर पुलिस ने शिक्षकों को बैरीकेडिंग लगाकर आगे जाने से रोक दिया। पुलिस के रोकने के दौरान पुलिस और कुछ शिक्षकों में नोकझोंक की नौबत आ गई थी। लेकिन शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने सभी से शांत रहने की अपील की। सिटी मिजस्ट्रेट ने ज्ञापन लेने के दौरान उन्हें आश्वासन दिया जल्द शासन को उनकी मांगों से अवगत करवाया जाएगा। इस अवसर पर धर्मेंद्र रावत देहरादून, दिगंबर नेगी चमोली, अल्मोड़ा से किशोर जोशी, टिहरी से चंद्रवीर नेगी, उत्तरकाशी से जयदेव राणा, बागेश्वर से दीपक रावत, चंपावत से उत्तम फर्त्याल, पिथौरागढ़ से करन सामंत, प्रकाश जोशी, जितेंद्र वल्दिया, मनोज तिवारी, अश्विनी चौहान, सुरेश उप्रेती, देवेंद्र चौधरी, मनोज जुगरान, विक्रम झिंक्वाण, दीपक पंत आदि मौजूद रहे।

ये हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें
– आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
– प्रदेश के समस्त शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए पूर्व व्यवस्था के अनुरूप पुरानी पेंशन योजना को तत्काल बहाल किया जाए।
– राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के तहत डाइट, एससीईआरटी सहित अकादमिक संस्थानों के पुनर्गठन में प्राथमिक शिक्षकों को भी सम्मिलित किया जाए और सम्मानजनक अवसर दिए जाएं।
– कार्यरत अप्रशिक्षित शिक्षकों को उनके शैक्षणिक अनुभव के आधार पर टीईटी से मुक्त किया जाए या सरल विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए और वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए।
– प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को तीन वर्ष की सेवा पूर्ण होने के बाद सेवाकाल में कम से कम एक बार अंतर्जनपदीय, अंतरमंडलीय व पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा मिले।
– गोल्डन कार्ड योजना की कमियां दूर कर शिक्षकों, कर्मचारियों, पेंशनरों को गुणवत्तापूर्ण कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
– धारा-23 और धारा-27(घ) के अंतर्गत पात्र शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए।
– प्रदेश के शिक्षामित्रों को न्यूनतम वेतनमान, मानदेय ₹35,400 और महंगाई भत्ते का लाभ दिया जाए।
– ऑनलाइन विभागीय कार्यों के लिए शिक्षकों को मोबाइल रिचार्ज भत्ता दिया जाए, तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
– प्राथमिक विद्यालयों के कोटिकरण (कैटेगरी निर्धारण) में व्याप्त विसंगतियों का पुनः परीक्षण कर न्यायसंगत समाधान किया जाए।
– कोटिकरण संबंधी विवाद के कारण रुकी स्थानांतरण प्रक्रिया के समाधान तक जिलों में आवश्यकतानुसार शिक्षकों की तैनाती, व्यवस्था के निर्देश जारी किए जाएं।
– प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए। आरटीई अधिनियम-2009 की धारा 27 के अनुरूप केवल सीमित कार्य ही सौंपे जाएं।

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शिक्षकों के कूच के दौरान लगा जाम
परेड ग्राउंड से शिक्षकों के सचिवालय कूच के दौरान लैंसडोन चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर के आसपास कुछ देर के लिए जाम लगा। हालांकि शिक्षक संगठन के नेताओं की ओर से लगातार यह अपील की गई कि सभी लाइन बनाकर ही आगे बढ़ें, ताकि वाहन चालकों, राहगीरों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े। कुछ देर के लिए आसपास की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई। सचिवालय रोड पर आवाजाही बंद रहने के दौरान वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों से आना जाना पड़ा। व्यवस्था बनाने के लिए सीपीयू और पुलिस को तैनात किया गया था.

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