नई टिहरी। टिहरी और उत्तरकाशी के 98 गांवों में नए भवन निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की व्यवस्था को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे है। टिहरी झील के समीप आवासीय और गैर आवासीय भवनों का निर्माण करने से पहले टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) से नक्शा स्वीकृत कराने की प्रक्रिया पर स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज किया है।सोमवार को चाह-गडोलिया की जिला पंचायत सदस्य शकुंतला पंवार के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने डीएम व टाडा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिका खंडेलवाल को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया। टाडा की ओर से 21 अगस्त को जारी सूचना के अनुसार टिहरी झील के आसपास बसे भागीरथी और भिलंगना घाटी के 98 गांवों को प्राधिकरण के अंतर्गत शामिल किया गया है। उक्त गांवों में आवासीय और गैर आवासीय भवनों का निर्माण करने से पहले लोगों को नक्शा स्वीकृत करवाना होगा। इस मौके पर ज्येष्ठ उपप्रमुख त्रिलोक बिष्ट, प्रधान मधुबाला भट्ट, रमेश राणा, राकेश कुमाईं, सोहन सिंह राणा, प्रदीप भट्ट, महाजन पंवार, राजेंद्र बिष्ट मौजूद रहे।
इधर, अधिवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने बताया कि इस मुद्दे पर 31 अगस्त को जाखणीधार ब्लॉक क्षेत्र के लोगों की पीपलडाली में बैठक आयोजित की गई है। बैठक में टाडा के आदेश और उससे ग्रामीणों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। नमामि गंगे के जिला संयोजक अक्षत पवन बिजल्वाण ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आवासीय निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की व्यवस्था निरस्त करने की मांग की है। डीएम नितिका खंडेलवाल का कहना है कि संबंधित गांव वर्ष 2013 से टाडा में अधिसूचित हैं। प्राधिकरण की व्यवस्था झील क्षेत्र में नियोजित विकास और बेहतर नियोजन के उद्देश्य से लागू की गई है।
टाडा से नक्शा पास करने की व्यवस्था पर जताया विरोध










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