बागेश्वर। चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संगठन की बैठक में प्रशासन की ओर से धरना-प्रदर्शन के लिए स्थान चयन किए जाने पर नाराजगी जताई गई। संगठन ने इसे तानाशाहीपूर्ण रवैया बताते हुए कहा कि बिना राजनीतिक, सामाजिक और आंदोलनकारी संगठनों को विश्वास में लिए धरना स्थल तय करना उचित नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि बागेश्वर की पहचान आंदोलनों की धरती के रूप में है। कुली बेगार आंदोलन से जुड़ी इस ऐतिहासिक भूमि पर देश-विदेश से आंदोलनकारी प्रेरणा लेने पहुंचते हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने ऐसा स्थान चयनित किया है, जहां दस लोग भी ठीक से नहीं बैठ सकते। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, ऐसे में चयनित स्थल व्यावहारिक नहीं है।संगठन के अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि धरना स्थल चयन के दौरान राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, आंदोलनकारी संगठनों, बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों से राय नहीं ली गई। उन्होंने प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने और सभी संबंधित संगठनों एवं प्रतिनिधियों का जिला स्तरीय सम्मेलन बुलाकर धरना स्थल पर विचार-विमर्श करने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर संगठन ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी। बैठक में गोविंद भंडारी, भुवन कांडपाल आदि मौजूद रहे।







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