अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान में एमबीबीएस बैच 2026 के नवप्रवेशित और बैच 2025 के वरिष्ठ विद्यार्थियों के लिए एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए रैगिंग मुक्त परिसर बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। जिला न्यायालय अल्मोड़ा की अधिवक्ता नीतू कपकोटी ने रैगिंग से संबंधित कानूनी प्रावधानों, दंडात्मक कार्रवाई और शिकायत निवारण प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रैगिंग विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और शैक्षणिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसमें संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनीष भट्ट ने रैगिंग के विभिन्न स्वरूपों, एनएमसी के एंटी रैगिंग नियमों, संस्थान की एंटी रैगिंग समिति, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और संभावित दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से रैगिंग के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने और किसी भी अप्रिय घटना की तत्काल सूचना देने की अपील की। एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मिला पलारिया ने चिकित्सा शिक्षा में अनुशासन, नैतिक मूल्यों, आपसी सहयोग और सकारात्मक व्यवहार के महत्व पर जोर दिया। संस्थान के चीफ वार्डन डॉ. एएन सिन्हा ने छात्रावास और महाविद्यालय परिसर में अनुशासन बनाए रखने तथा नियमों का पालन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और सम्मान संस्थान की प्राथमिकता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निधि मंगला ने किया। इस अवसर पर सहायक आचार्य डॉ. सुनीता तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. मयूरी और डॉ. शैलेश भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आपसी सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करने तथा किसी भी प्रकार की रैगिंग या उत्पीड़न की सूचना तत्काल संस्थान प्रशासन को देने के लिए प्रेरित किया गया।
मेडिकल कॉलेज में एंटी रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को बताए कानूनी प्रावधान














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