देहरादून। चुनावी साल में रक्षाबंधन का पर्व उत्तराखंड की सियासत में भी रंगता नजर आया। प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रमों में बहनों की मौजूदगी, उन्हें दिए गए उपहार और व्यवस्थाएं राजनीतिक चर्चा का विषय बन गईं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इन आयोजनों के जरिए अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। देहरादून में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी की ओर से आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने से भाजपा खेमे में उत्साह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम में पहुंचे और आयोजन की सराहना की। हालांकि, कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो ने सियासी माहौल गरमा दिया। वीडियो में कुछ महिलाएं कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और रक्षाबंधन पर मिले उपहारों को लेकर नाराजगी जताती दिखाई दीं। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और भोजन-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उपहार में मिले छाते और मिठाई को लेकर भी नाराजगी जताई गई। हालांकि, वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा के भीतर मंत्री गणेश जोशी के विरोधी खेमे को सरकार और मंत्री पर निशाना साधने का मौका मिल गया। सोशल मीडिया पर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। वहीं, मंत्री समर्थक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी को आयोजन की सफलता के तौर पर पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा और कांग्रेस के रक्षाबंधन कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक तुलना शुरू हो गई है। कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यक्रमों में जुटी भीड़ को लेकर दोनों दलों के समर्थक अपने-अपने आयोजन को सफल बता रहे हैं। यहां बहनों को दिए गए उपहार भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गए हैं। साड़ी, मिठाई, लिफाफे और अन्य उपहारों को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। दोनों पक्ष अपने कार्यक्रमों की पहुंच और जनसमर्थन को अधिक प्रभावी बताने में जुटे हैं। प्रदेश के करीब 70 विधानसभा क्षेत्रों में नेताओं की ओर से आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रमों पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं। कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़ को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। नेताओं की लोकप्रियता, संगठन की पकड़ और महिला मतदाताओं के बीच प्रभाव का आकलन भी इन आयोजनों के जरिए किए जाने की चर्चा है। रक्षाबंधन का पारंपरिक पर्व इस बार चुनावी साल में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी शक्ति प्रदर्शन का मंच बनता दिखाई दे रहा है। उपहार, भीड़ और कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं को लेकर छिड़ी बहस ने इस पर्व की राजनीतिक रंगत को और गहरा कर दिया है।
भाई बहन के प्यार पर चढ़ा सियासी रंग










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