देहरादून। निगमों में 10 साल से अधिक समय से संविदा पर तैनात कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर राज्य निगम अधिकारी कर्मचारी महासंघ ने सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय से सोमवार को सचिवालय में मुलाकात की। नियमितीकरण पर जल्द फैसला लेने की मांग की। इसके साथ ही शासन स्तर से निगमों के कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव का भी मुद्दा उठाया।
महासंघ अध्यक्ष दिनेश गोसाईं ने कहा कि सबसे बड़ी और अहम मांग संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाना है। इस पर सरकार पूर्व में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने का काम करे। नियमितीकरण के साथ ही जल संस्थान के पीटीसी, ठेका कर्मचारियों को श्रम मानकों के अनुसार न्यूनतम वेतन उपलब्ध कराया जाए। कहा कि शासन स्तर से ये तय हो चुका है कि जो भी आदेश राज्य कर्मियों के लिए जारी होगा, वो सीधे निगमों के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। इसके बावजूद हर बार महंगाई भत्ते से लेकर तमाम अन्य मामलों में निगमों के कर्मचारियों को अलग से आदेश कराना होता है।
महासचिव बीएस रावत ने कहा कि राज्य कर्मियों को जनवरी 2024 से महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई चार प्रतिशत किश्त का लाभ मिल चुका है। निगम कर्मचारी छह महीने से शासन के चक्कर काट रहे हैं। अभी तक सातवें वेतनमान के अनुरूप मकान किराया भत्ता तक नहीं दिया गया है। पदोन्नति में शिथिलीकरण का समय भी नहीं बढ़ाया जा रहा है। पूर्व में जो समय बढ़ाया गया था, वो पूरी तरह चुनाव आचार संहिता में समाप्त हो गया। कहा कि निगम कर्मचारियों के वेतन भत्तों में किसी भी तरह की कोई कटौती न की जाए। वेतन विसंगति समिति की संस्तुतियां को जारी करते हुए ग्रेड वेतन 1900 रुपए को समाप्त कर 2000 रुपए किया जाए। सचिव उद्योग की ओर से सभी मांगों पर जल्द ठोस कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने का आश्वासन दिया गया। इस अवसर पर दिनेश पन्त, टीएस बिष्ट, श्याम सिहं नेगी, शीशुपाल रावत, राजेश रमोला, ओम प्रकाश भट्ट, दिवाकर शाही, संदीप मल्होत्रा आदि उपस्थित रहे।
संविदा कर्मचारियों ने की नियमितीकरण पर जल्द फैसला लेने की मांग











