हरिद्वार। भूपतवाला में गंगा पटरी मार्ग की बदहाली और 26 साल पुराने पीठ बाजार के उजड़ने से प्रभावित छोटे दुकानदारों की समस्याओं को लेकर समाजसेवी नितिन यादव यदुवंशी ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जनता दरबार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के माध्यम से जिलाधिकारी को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। इनमें गंगा पटरी मार्ग के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के साथ पीठ बाजार के दुकानदारों के पुनर्वास तथा अवैध वसूली रोकने की मांग की गई है। पहले ज्ञापन में नितिन यादव ने बताया कि भागीरथी बिंदु से गीता कुटीर तक गंगा किनारे स्थित पटरी मार्ग की हालत बेहद खराब है। सड़क जगह-जगह टूटने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। वहीं, स्ट्रीट लाइटें बंद होने से रात में अंधेरा रहता है। इस मार्ग पर रोजाना सैकड़ों लोग टहलने और व्यायाम करने आते हैं। पुलिस और अन्य सरकारी भर्तियों की तैयारी कर रहे युवा भी यहां दौड़ का अभ्यास करते हैं। सड़क की बदहाली से दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। आगामी स्नान पर्वों और कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने मार्ग की मरम्मत, पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण कराने की मांग की।दूसरे ज्ञापन में उन्होंने बताया कि भूपतवाला में वर्ष 2000 से लग रहे पीठ बाजार में 150 से अधिक छोटे दुकानदार सब्जी, फल, कपड़े और घरेलू सामान बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। कुंभ मेले की तैयारियों के चलते बाजार बंद होने से दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। नितिन यादव ने आरोप लगाया कि मोतीचूर स्टेशन मार्ग पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों से कुछ लोग अवैध वसूली कर रहे हैं। पैसे नहीं देने पर उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानदारों को पास के निजी प्लॉट में दुकान लगाने के लिए भेजकर प्रति दुकान 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। सड़क किनारे दुकान लगाने वालों से भी वसूली की जा रही है। उन्होंने उजाड़े गए दुकानदारों को दूधाधारी चौक पर फ्लाईओवर के नीचे या अन्य सरकारी भूमि पर अस्थायी बाजार लगाने की अनुमति देने की मांग की। साथ ही कहा कि बाजार में वसूली तत्काल रोकी जाए और निर्धारित शुल्क केवल नगर निगम के अधिकृत कर्मचारी द्वारा ही पारदर्शी तरीके से लिया जाए। उन्होंने प्रशासन से दोनों मामलों में शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद जताई।
भूपतवाला में गंगा पटरी मार्ग की मरम्मत और पीठ बाजार के पुनर्वास की मांग











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