देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड के जंगलों में तेजी से फैलती आग को रोकने में सरकारी सिस्टम के नाकाम रहने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कांग्रेस भवन में प्रेस से बातचीत में सरकार के आपदा प्रबंधन के दावों पर सवाल उठाए। कहा कि पूरे प्रदेश के साथ राजधानी देहरादून तक में आग से निपटने को लेकर आपदा प्रबंधन का इंतजाम नहीं है। धस्माना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि दस सालों में आपदाओं से निपटने का एक बड़ा प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है। ये तंत्र कितना प्रभावी है, इसकी पोल इस अप्रैल महीने में ही उत्तराखंड में खुल गई है। गर्मियां शुरू होते ही पूरे राज्य के जंगल जल रहे हैं। लगातार घटनाएं बढ़ रही हैं। नैनीताल, अल्मोड़ा, चम्पावत, पिथौरागढ़, पौड़ी में हालात बेकाबू हो रखे हैं। इन घटनाओं से निपटने की तैयारी सितंबर महीने से ही शुरू करनी थी। उत्तराखंड में ये तैयारी आग लगने के बाद शुरू होती है। इसका खामियाजा पूरे राज्य को भुगतना पड़ रहा है।
कहा कि आग की घटना से निपटने का सिस्टम राजधानी देहरादून में ही ठप है। आपदा प्रबंधन मशीनरी का रिस्पॉन्स सिस्टम तक निराशाजनक है। सोमवार को खुड़बुड़ा छबील बाग में लगी आग ने ट्रिपल इंजन की सरकार की पोल खोल दी है। यहां फायर ब्रिगेड को पहुंचने में ही डेढ़ घंटे से अधिक का समय लग गया। जबकि राजधानी देहरादून में पूरा सरकारी अमला मौजूद है। घटना के बावजूद कोई भी सत्ताधारी दल का छोटा बड़ा जनप्रतिनिधि तक मौके पर नहीं पहुंचा।
पेयजल संकट से निपटने के नहीं कोई इंतजाम: धस्माना ने कहा कि देहरादून शहर में पेयजल का तेजी से गंभीर संकट खड़ा होता जा रहा है। हर वार्ड में पेयजल संकट की स्थिति है। विभागों के पास इस संकट से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है। तैयारी की कोई प्लानिंग नहीं है। न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था है। ये सब सरकारी उदासीनता और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण हो रहा है। इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
वनाग्नि से निपटने में सरकारी सिस्टम पूरी तरह फेल: सूर्यकांत धस्माना











