ऋषिकेश। एलयूसीसी ने ऋषिकेश में करीब एक लाख निवेशकों के साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये हड़प लिए हैं। यहां सोसायटी की शाखाओं में ताले लगने से निवेशक एजेंटों के घर पर तकाजा कर रहे हैं, तो एजेंट अब मामले में केंद्र और राज्य सरकार के सहकारिता मंत्रालय की भूमिका पर ही सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से मामले में शीघ्र कार्रवाई करते हुए निवेशकों को पैसा प्रबंधन के माध्यम से लौटाने की मांग दोहराई है। कार्रवाई नहीं होने पर 20 दिन बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। शुक्रवार को यात्रा बस अड्डा स्थित प्रेस क्लब में द लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) के एजेंटों ने प्रेसवार्ता की।
जय सिंह जुगतवाण ने बताया कि वर्ष 2017 में एलयूसीसी ने ऋषिकेश क्षेत्र में निवेश का काम शुरू किया। आईडीपीएल में सोसायटी की न सिर्फ शाखा, बल्कि एटीएम भी खुला है। एजेंटों के माध्यम से मध्य वर्गीय परिवारों को आरडी व एफडी के जरिये रकम दोगुनी करने का झांसा दिया गया। आरबीआई में सोसायटी पंजीकृत होने के चलते भरोसे में आकर लोगों की रकम निवेश भी करा दी।
सुमन चमोला ने बताया कि वर्ष 2021 तक सोसायटी ने निवेशकों को भुगतान किया, लेकिन इसके बाद साल 2024 में पूरी होने वाली एफडी व आरडी की रकम लौटाने के बजाय कार्यालय ही बंद कर लिया। बीते वर्ष में नवंबर के बाद से निवेशकों को रकम वापस नहीं मिली। उन्होंने बताया कि आरबीआई में पंजीकृत और राज्य में सरकार की एनओसी के माध्यम से निवेश का कारोबार संचालित करने वाली सोसायटी को लेकर अभीतक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। बताया कि ऋषिकेश क्षेत्र में सोसाइटी के एक लाख निवेशकों को करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये फंस गया है।
प्रर्मिला रावत ने बताया कि इस बाबत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की जा चुकी है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग से 20 दिन भी कार्रवाई का भरोसा दिया है। चेताया कि इस समय अंतराल में कार्रवाई नहीं हुई, तो सड़कों पर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदार सरकार के सहकारिता मंत्रालय की होगी।
बीस दिनों में रकम वापस न मिलने पर आंदोलन करेंगे एलयूसीसी पीड़ित निवेशक और एजेंट






