रुद्रपुर। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति डॉ. एसके कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय को केवल शिक्षण संस्थान या डिग्री बांटने वाली दुकान की तरह नहीं चलाया जा सकता। विश्वविद्यालय की सार्थकता तभी है, जब यहां का विज्ञान और अनुसंधान किसानों की वास्तविक जरूरतों से जुड़े, वैज्ञानिक उनके खेतों तक पहुंचें और विकसित तकनीक उनके जीवन में बदलाव लाए। 120वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में कुलपति ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय को अगले 20 वर्षों में उत्तराखंड की कृषि किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इसका रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। करीब 250 विशेषज्ञों की टीम पूरे प्रदेश के कृषि रोडमैप पर काम कर रही है। कृषि से जुड़ी नीतियों के निर्माण में भी विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार, शासन, विश्वविद्यालय और कृषि विभाग के बीच नया इंटीग्रेशन मॉडल विकसित किया जा रहा है। किसान मेले के दौरान शासन और कृषि विभाग के करीब 40 वरिष्ठ अधिकारी पंतनगर में दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के शोध और विभागों की जमीनी पहुंच के बीच बेहतर तालमेल से प्रदेश की कृषि की तस्वीर बदली जा सकती है। कहा कि आज प्रदेश के कृषि विभाग समेत विभिन्न संस्थानों में बड़ी संख्या में पंतनगर के पूर्व विद्यार्थी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर की सबसे बड़ी ताकत यहां की कार्य संस्कृति है। यहां वैज्ञानिक समय देखकर नहीं, बल्कि लक्ष्य लेकर काम करते हैं। पंतनगर केवल विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि किसान, विज्ञान और सेवा की संस्कृति है। इसी संस्कृति और सरकार-विज्ञान-किसान के समन्वय से उत्तराखंड की कृषि में बड़ा बदलाव लाया जाएगा।
डिग्री बांटना नहीं, किसानों के जीवन में बदलाव लाना उद्देश्य : कुलपति










Leave a Reply