देहरादून। अल्पसंख्यक आयोग में करीब नौ साल से तैनात सचिव जेएस रावत को उनके मूल विभाग राजस्व परिषद में रिलीव कर दिया गया है। साल 2025 में पांच साल की प्रतिनियुक्ति एवं 55 साल की उम्र के सारी प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के आदेश के क्रम में यह कार्रवाई की गई है। निदेशक दीप्ति सिंह की ओर से पूर्णकालिक या प्रतिनियुक्ति पर नए सचिव न मिलने तक डिप्टी डायरेक्टर हीरा सिंह बसेडा को चार्ज सौंपा है। उधर, आयोग उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने सीएम पुष्कर सिंह धामी एवं विभागीय मंत्री खजानदास को चिट्ठी लिखकर जेएस रावत को वापस सचिव बनाए जाने का विशेष अनुरोध किया है। उन्होंने पिछले नौ साल के कार्यकाल में बेहतर कार्यों का हवाला दिया है और कहा है कि अप्रैल में सुनवाई के बाद अभी करीब 150 मामले लंबित है, जिसके निस्तारण में रावत के सहयोग की जरूरत है। रावत के पास जिला अल्पसंख्यक अधिकारी का भी चार्ज था, उनकी जगह अब सहायक अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बीपी त्रिवेदी को यह जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, निदेशालय में ईएसआई से फार्मेसी संवर्ग के बरकत अली को सहायक निदेशक के पद पर प्रतिनियुक्ति पर तैनाती मिली है। उन्हें जिले का डीडीओ बनाया गया है।
छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े में 30 कॉलेजों से होगी 1.35 करोड़ की वसूली: अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े में अब संदिग्ध शिक्षण संस्थानों से सरकारी धन की वसूली शुरू होगी। प्रदेश के 29 कॉलेजों से कुल एक करोड 35 लाख 5300 रुपये की सौ फीसदी वसूली की जाएगी। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक दीप्ति सिंह ने पांच जिलों के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। उधर, इस मामले में जिलों में कॉलेजों के खिलाफ मुकदमे भी कराए गए हैं और एसआईटी जांच भी चल रही है। निदेशक की ओर से देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, यूएसनगर एवं पौड़ी जिलों के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। जिलों को दिए आदेश में कहा है कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 की छात्रवृत्ति योजनाओं में अनियमितताओं पर संदिग्ध संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में भारत सरकार और उत्तराखंड शासन के अफसरों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गठित एसआईटी की जांच प्रगति की समीक्षा भी की गई। जिलों को वसूली के लिए राजस्व एवं पुलिस विभाग से भी सहयोग के लिए कहा गया है.
रोजाना देंगे रिपोर्ट, लापरवाही पर नपेंगे: छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर भारत सरकार सख्त है। उत्तराखंड के अलावा कई अन्य राज्यों में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। सरकार द्वारा वसूली एवं विधिक कार्रवाई के आदेश के बाद जिलों के अफसरों को केस दर्ज कराने के आदेश दिए गए, कुछेक द्वारा लापरवाही पर उन्हें चेतावनी दी गई। अब दोबारा से निदेशक के माध्यम से रोजाना रिपोर्ट देने एवं लापरवाही पर कार्रवाई को चेताया गया है। बता दें कि करीब एक साल पहले पूर्व वसूली के आदेश हुए थे, लेकिन अफसरों ने ना वसूली की और ना केस कराए। अब भारत सरकार की सख्ती के दोबारा से इस पर कार्रवाई शुरू हुई है.
छात्रों को ढूंढ रहे कॉलेज वाले: अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति सीधे छात्र-छात्राओं के खाते में गई है। कॉलेजों के स्तर पर सांठगांठ करने, गलत तरीके से लगाए दस्तावेजों का सत्यापन करने एवं विभाग को गुमराह करने का आरोप है। अब एसआईटी जांच, मुकदमे होने एवं वसूली के आदेश के बाद कॉलेजों में हड़कंप मचा है। सूत्रों का कहना है कि कॉलेज वाले अब छात्रों को ढूंढने एवं उनके दस्तावेज खंगालने में लगे हैं.
जिला शिक्षण संस्थान वसूली की राशि
हरिद्वार 19 68.80 लाख
ऊधमसिंहनगर 7 27.68 लाख
देहरादून 1 16.74 लाख
नैनीताल 2 21.65 लाख
पौड़ी 1 18300 रुपये










Leave a Reply