अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा की विकसित मंडुआ किस्म ‘वीएल मंडुआ 400’ कर्नाटक के किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है। कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन, कम समय में पकने और अच्छी उपज क्षमता के चलते इस किस्म को किसानों का भरोसा मिल रहा है। राष्ट्रीय बीज निगम, दावणगेरे के अनुसार, खरीफ सीजन 2026 में कर्नाटक में करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म का बीज उत्पादन किया गया। इसमें किसान उत्पादक संगठनों से जुड़े 92 लघु एवं सीमांत किसान शामिल रहे। इस दौरान सामान्य बिक्री के जरिए करीब 500 कुंतल और डीलरों के माध्यम से 150 कुंतल बीज बेचा गया। कम बारिश के बावजूद किसानों ने फसल के प्रदर्शन पर संतोष जताया। इस किस्म की खासियत है कि यह 100 दिन से कम समय में पक जाती है। इसकी बालियां भी सघन होती हैं। वर्षा आधारित खेती में कम अवधि में तैयार होने वाली फसल मौसम के आखिरी दौर में सूखे के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। पोषण के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। इसके 100 ग्राम दाने में 399.5 मिलीग्राम कैल्शियम पाया गया है। अखिल भारतीय समन्वित लघु धान्य अनुसंधान परियोजना के तहत 40 स्थानों पर हुए परीक्षणों में इसकी औसत उपज 34.77 कुंतल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म ‘वीएल मंडुआ 376’ की 31.11 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज से 11.5 प्रतिशत अधिक है। किसानों को फसल का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाने और इसके गुणों की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ने कर्नाटक के विजयनगर जिले के उज्जैनी गांव में किसान क्षेत्र दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के अनुसार, कम समय में पकने, अच्छी उपज और अधिक कैल्शियम वाली यह किस्म किसानों की आय और पोषण सुरक्षा बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
वीपीकेएएस के वैज्ञानिकों की मंडुआ किस्म कर्नाटक में छाई, सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन
















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