अल्मोड़ा। तीन दिवसीय अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल का रविवार को साहित्यिक विमर्श, विचारोत्तेजक चर्चाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण और विकास मॉडल से लेकर महिला अधिकारों तथा मीडिया की भूमिका तक विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। पर्यावरण और उत्तराखंड के विकास मॉडल पर आयोजित सत्र में ‘पीपल बाबा’ और रोमोला बुटालिया ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बढ़ रहा है, जबकि इस विकास प्रक्रिया में आम लोगों के हितों और जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने गढ़वाल में बढ़ते ओवर-टूरिज्म पर चिंता जताते हुए कहा कि कुमाऊं भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। वक्ताओं ने समय रहते इस पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई। फेस्टिवल में ‘वीमेन एट क्रॉसरोड: ट्रेडिशन, ट्रांसफॉर्मेशन एंड टुमारो’ विषय पर महिला विमर्श सत्र आयोजित किया गया। तनुजा बहुगुणा के संचालन में हुए इस सत्र में इशिता चौहान और डॉ. मीता उपाध्याय ने महिलाओं की बदलती भूमिका, परंपराओं और भविष्य की चुनौतियों पर विचार रखे। चर्चा में कहा गया कि बदलते सामाजिक परिवेश में महिलाओं की सोच और जरूरतों के अनुरूप परंपराओं की नए सिरे से व्याख्या जरूरी है। इसमें उन युवा महिलाओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई, जो आने वाले समय में सार्वजनिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ाएंगी। इशिता चौहान ने दर्शकों के साथ संवाद किया, वहीं डॉ. मीता उपाध्याय ने भी अपने विचार साझा किए। मीडिया की भूमिका पर आयोजित ‘खबर, नजर और नजरिया’ सत्र में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘बारामासा’ के संस्थापक एवं वरिष्ठ पत्रकार राहुल कोटियाल ने आशुतोष पंत के साथ संवाद किया। राहुल कोटियाल ने कहा कि पहाड़ के विकास की दिशा और उसका एजेंडा स्थानीय लोगों को ही तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जागरूकता जितनी अधिक होगी, मीडिया भी उतनी ही प्रभावी भूमिका निभा सकेगा। फेस्टिवल में साहित्यिक चर्चाओं के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। रात्रिकालीन कार्यक्रमों में युवा गायक एवं रैपर तरुण बिष्ट और रोहन पांगती ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। समापन अवसर पर संयोजक विनायक पंत ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रायोजकों, सहयोगियों, कोर टीम के सदस्यों और स्वयंसेवकों का आभार जताया। कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ. वसुधा पंत, मनोज गुप्ता, रचित पंत, मीनाक्षी पाठक, दीपक जोशी, दिलीप, मनीषा पंत, तनुजा बहुगुणा, भूषण पांडे और गुंजिता पंत आदि मौजूद रहे।
साहित्य, समाज और संस्कृति के विमर्श के साथ अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल का समापन
















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