देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से धोखाधड़ी से साले का इलाज कराने के मामले में आरोपी जीजा-साले के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। मुख्य आरोपी अपने कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से अपने रिश्तेदार का हृदय रोग विभाग में इलाज करा रहा था। शहर कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शहर कोतवाल हरिओम राज चौहान ने बताया कि अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनएस बिष्ट ने तहरीर दी। बताया कि बीते 26 मई को गोविंदगढ़ निवासी मंजीत सिंह ने कार्डियोलॉजी विभाग में डॉ. सलील गर्ग की देखरेख में मरीज को भर्ती कराने के लिए अपना आयुष्मान कार्ड लगाया और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी की।
29 मई को जब मंजीत डिस्चार्ज फाइल लेकर आयुष्मान मित्र कुश भंडारी के पास पहुंचा तो नियमों के तहत उससे मरीज की बेड पर लेटी हुई फोटो मांगी गई। यह सुनकर वह घबराकर वहां से खिसक गया। शक होने पर आयुष्मान मित्र ने वार्ड में जाकर नर्सिंग ऑफिसर को मंजीत का पहचान पत्र दिखाया। जिस पर नर्सिंग ऑफिसर ने साफ कर दिया कि भर्ती मरीज यह व्यक्ति नहीं है। 30 मई को अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर फर्जीवाड़े की पूरी तरह पुष्टि हो गई। इसी दौरान जब मंजीत अपना कार्ड वापस मांगने काउंटर पर आया तो उसे सुरक्षाकर्मियों की मदद से पकड़ लिया गया। कड़ी पूछताछ में उसने कुबूल किया कि वह मेरठ (यूपी) निवासी रिश्तेदार विक्की का इलाज अपने कार्ड पर करा रहा था। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही मंजीत ने सीने में दर्द का बहाना बना लिया और जमीन पर लेट गया। जिसके बाद उसे इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा। वहीं, असली मरीज विक्की को भी स्वास्थ्य जांच के लिए सीसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।









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