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किसी भी धर्म और पंथ का प्रतीक पहनकर अपमान नहीं करना चाहिए: रामदेव

किसी भी धर्म और पंथ का प्रतीक पहनकर अपमान नहीं करना चाहिए: रामदेव
हरिद्वार। संसद में सांसद पप्पू यादव के प्रोटेस्ट पर बोलते हुए योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि किसी भी धर्म और पंथ का प्रतीक पहनकर अपमान नहीं करना चाहिए। भगवा पहनकर हमारे सनातन का अपमान करना आपत्तिजनक है। यह धार्मिक, सामाजिक, लोकतांत्रिक और संवैधानिक रूप पाप और अपराध है। राजनीतिक मुद्दा उठाने के लिए किसी भी धर्म को टारगेट न करके अपनी बात रखनी चाहिए। आपको मुद्दा उठाने का अधिकार है लेकिन भारत का संविधान भगवा और सनातन का अपमान करने का अधिकार नहीं देता है। जितना एस सी एसटी का अपमान करना अपराध है, उतना ही सनातन का अपमान करना ही अपराध है। उन्होंने कहा कि किसी संत, ब्राह्मण और पुजारी का अपमान करना असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक अपराध है। यह बातें उन्होंने आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
कांवड़ यात्रा पर संदेश
योगगुरु स्वामी रामदेव ने कांवड़ यात्रा पर आने वाले शिवभक्तों से शांति, अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा पूरी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा शिवभक्ति और आत्मसंयम का पर्व है, इसलिए श्रद्धालु किसी भी प्रकार के नशे, हिंसा, तोड़फोड़ और अव्यवस्था से दूर रहें। उन्होंने कहा कि सच्चा शिवभक्त वही है, जो शिवत्व के आदर्शों को अपने आचरण में उतारे। वहीं, संसद परिसर में सांसद पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी धर्म या उसके प्रतीकों का अपमान स्वीकार्य नहीं है।
भूल-चूक और संयम
रामदेव ने कहा कि मां गंगा भगवान शिव का ही स्वरूप हैं। कांवड़िये श्रद्धा और मर्यादा के साथ गंगास्नान करें तथा गंगाजल भगवान शिव को अर्पित करें। उन्होंने कहा कि भांग, धतूरा, गांजा, सुल्फा, बीड़ी और सिगरेट जैसे किसी भी प्रकार के नशे का सेवन शिवभक्ति का हिस्सा नहीं है। भगवान शिव स्वयं नशा नहीं करते, इसलिए शिवभक्तों को भी इन बुराइयों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या अनुशासनहीनता शिव आराधना के विपरित है।

 

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