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ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करो, देहरादून में कांग्रेस का सचिवालय कूच

देहरादून। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी विरोध शुक्रवार को देहरादून में भी नजर आया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच किया। पुलिस ने सचिवालय से पहले ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के पास धरने पर बैठ गए और केंद्र सरकार, भाजपा तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की।प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस दौरान पुतला भी दहन किया। देशभर में 25 सितंबर को कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, करन मेहरा, गोविंद सिंह कुंजवाल, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक विक्रम सिंह नेगी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) समेत चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाया जाएगा।
कांग्रेस का यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब देश के विभिन्न हिस्सों में भी पार्टी कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर निर्वाचन आयोग से जवाब मांग रही है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की ओर से सामने आए पक्ष में कहा गया है कि आयोग के भीतर विचारों में मतभिन्नता सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और एसआईआर सहित हाल की पहलों से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
इस पूरे विवाद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।

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