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जूना अखाड़े ने किया वाल्मीकि अखाड़े का गठन

हरिद्वार। सनातन धर्म के उत्थान और समाज के सभी वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल करते हुए श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े ने वाल्मीकि अखाड़े के गठन की घोषणा की। इस अवसर पर दिल्ली स्थित वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर कृष्णा शाह विद्यार्थी नंद गिरी महाराज को वाल्मीकि अखाड़े का जगतगुरु की उपाधि देकर सम्मानित किया गया। गुरुवार को हरिहर आश्रम, कनखल और माया देवी मंदिर में आयोजित धार्मिक समारोह में अखाड़े की परंपराओं के अनुसार उनका अभिषेक किया गया। आयोजित कार्यक्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने वैदिक अनुष्ठान के साथ कृष्णा शाह विद्यार्थी नंद गिरी महाराज का अभिषेक किया और उन्हें जगतगुरु बनाए जाने की घोषणा की।उन्होंने विश्वास जताया कि वह समाज के सभी वर्गों को जोड़ते हुए सनातन धर्म की उन्नति, प्रगति और विकास के लिए कार्य करेंगे। इसके बाद माया देवी मंदिर में आयोजित समारोह में अधिष्ठात्री देवी माया के पूजन के उपरांत जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज, वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज तथा आवाहन अखाड़े की श्रीमहंत विभा गिरी महाराज ने चादर ओढ़ाकर कृष्णा शाह विद्यार्थी नंद गिरी महाराज का जगतगुरु पद पर अभिषेक किया। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि जूना अखाड़ा सदैव समाज के सभी वर्गों का सम्मान करता आया है और सनातन धर्म की रक्षा एवं उसके विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि अखाड़े का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि समाज के सभी वर्ग सनातन धर्म की मुख्यधारा से जुड़कर उसे और अधिक सशक्त बना सकें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी कुंभ पर्व में वाल्मीकि अखाड़ा जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान में शामिल होगा तथा अन्य महामंडलेश्वरों की तरह उसे भी रथ, छत्र और सिंहासन की परंपरागत सम्मान व्यवस्था प्रदान की जाएगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने जूना अखाड़े की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश पूरे देश और दुनिया में जाएगा तथा सभी वर्ग मिलकर सनातन धर्म को और मजबूत करेंगे। समारोह में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत पूर्णागिरि, श्रीमहंत गिरीश आनंद गिरि, महंत आनंदेश्वर गिरि, महंत नीलकंठ गिरि, महंत आदित्य गिरि, महंत भीष्म गिरि, महंत मुन्ना गिरि, श्रीमहंत देवानंद सरस्वती, भीमनाथ, चेतनानंद, विष्णु दास, साहिल नाथ, सुशांत गोल्डी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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