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चंपावत दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच से साजिश का खुलासा

देहरादून। चंपावत जिले में दर्ज दुष्कर्म मामले की पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक तहरीर में तीन व्यक्तियों पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक चंपावत श्रीमती रेखा यादव के पर्यवेक्षण में दस सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया। वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि घटना सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा थी। जांच में सामने आया कि पीड़िता अपनी इच्छा से विवाह समारोह में गई थी। बंद परिपथ कैमरे की फुटेज और कॉल विवरण से उसके आवागमन की पुष्टि हुई। चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की चोट या जबरदस्ती के संकेत नहीं मिले। गवाहों के बयान भी तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कमल रावत ने बदले की भावना से प्रेरित होकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर झूठा घटनाक्रम रचा। नामजद व्यक्तियों विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की घटना स्थल पर मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई। डिजिटल और न्यायवैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण जारी है तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि महिला और बाल अपराधों के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनाई जाती है। साथ ही झूठे आरोपों पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। आमजन और मीडिया से अपील की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रकाशन करें।

 

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