विकासनगर। पुरानी पेंशन योजना की बहाली और शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने आंदोलन की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। रविवार को हुई संगठन की बैठक में शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन शिक्षकों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, जबकि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों की चिंताओं को सरकार और संबंधित मंचों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाएगा। गढ़वाल मंडल अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने कहा कि शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए संगठन को एकजुट होकर प्रभावी पहल करनी होगी।उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाने पर जोर दिया। साथ ही शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता के संबंध में संगठन का पक्ष मजबूती से रखने और आवश्यक स्तर पर संवाद करने की बात कही। बैठक में शिक्षकों की सेवा-शर्तों, अन्य लंबित समस्याओं और शिक्षक हितों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने कहा कि इन मुद्दों को उचित मंच पर उठाने के साथ ही संगठन की आगामी गतिविधियों और रणनीति को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और अधिक से अधिक शिक्षकों को गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। मुख्य अतिथि श्री गुरु राम राय इंटर कॉलेज सहसपुर के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त डॉ. रविन्द्र कुमार सैनी ने शिक्षक हितों से जुड़े विषयों को संगठित तरीके से उठाने को जरूरी बताया। उन्होंने संगठन की सक्रियता और एकजुटता को महत्वपूर्ण बताया। जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार सैनी, मंत्री तजेंद्र धीमान, मीडिया प्रभारी एसके सैनी, चतर सिंह नेगी, पीयूष पांडेय, धर्मेंद्र कुमार, रमन समेत संगठन के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी की अनिवार्यता के विरोध पर शिक्षकों का मंथन











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